Indian school news:-भारतीय स्कूल शिक्षा इतनी खराब क्यों?

Indian school news:-भारतीय स्कूल शिक्षा इतनी खराब क्यों?

इंडियन एजुकेशन सिस्टम जो हर साल अपने परीक्षा को ले कर सुर्ख़ियो में बना रहता है हर समय इसके एजुकेशन सिस्टम पर सवाल उठता रहता है, ये सवाल कभी सिस्टम पर तो कभी सरकार पर उठता रहता है क्या ये सवाल सिस्टम पर और सरकार पर उठाना सही है या गलत?

रूखमणि बैनर्जी जो इंडियन एजुकेशन को और अच्छी बनाने का लिए एक संस्था प्रथम चलती है, ये हर साल एजुकेशन पर अपने एक सर्वे रिपोर्ट निकालती है 2019 से चली आ रही कॉविड से स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालय बंद होने के कारण इन समय के एजुकेशन की तुलना नहीं किया जा सकता और ना ही इन कारण से सिस्टम और सरकार को दोष दिया जा सकता है। प्रथम की अपनी एक सर्वे Annual Status Of Education Report ( ASER ) में इनकी संस्था ने 2018 में देश के 596 जिलों में 546727 बच्चो का सर्वे किया, इन सर्वे में ये 1 से 8 तक के छात्रों को हिंदी और गणित का परीक्षण लेते है।

हिंदी में ये सभी बच्चो को “सावन का महीना था। आसमान में बहुत काले-काले बादल छाए थे ठंडी-ठंडी हवा चल रही थी मुझे झूला झूलने का मन किया। बड़े भैया एक मोटी सी रस्सी लेकर बाहर आए। भैया ने रस्सी को पेड़ से लटकाकर झूला बनाया। सब ने मिलकर खूब झूला झूला बाकी बच्चे भी आकर मजे से झूलने लगे झूलते-झूलते रात हो गई।” को पढ़ने को बोलते है।
और गणित में कुछ घटाना का सवाल देते है

हिंदी में

https://viralnewz.in/education/indian-school-news/
कक्षा 1 से छात्र 5.8%
कक्षा 2 से छात्र 14.7%
कक्षा 3 से छात्र 27.2%
कक्षा 4 से छात्र 40.7%
कक्षा 5 से छात्र 50.2%
कक्षा 6 से छात्र 59.8%
कक्षा 7 से छात्र 67.7%
कक्षा 8 से छात्र 72.8%

सोचने वाली बात ये है की यह टेक्स्ट कक्षा 1 के छात्रों का लिए मुस्किल हो सकता है पर कक्षा 5 के छात्रों के लिए नहीं को केवल 50% छात्र ही सफल हुए है।

गणित में

https://viralnewz.in/education/indian-school-news/
कक्षा 1 से छात्र 3.9%
कक्षा 2 से छात्र 10.6%
कक्षा 3 से छात्र 19.6%
कक्षा 4 से छात्र 24.6%
कक्षा 5 से छात्र 24.5%
कक्षा 6 से छात्र 24%
कक्षा 7 से छात्र 24%
कक्षा 8 से छात्र 22.1%

ये डाटा कुछ हैरान कर देने वाला है क्यों की ये डाटा कक्षा 4 तक तो बढ़ा पर कक्षा के बाद ये डाटा गिरता गया और यह गिरता हुआ डाटा भारत के नीव को गिरा रहा है।

भारत में एजूकेशन सिस्टम क्या है ? और ये सिस्टम को स्कूल लागू कैसे करते है ?

1:- शिक्षक की अनुपस्थिति

रिपोर्ट के अनुसार 18.5% सरकारी स्कूलों के शिक्षक प्रतिदिन अनुपस्थित रहते है पर उनमें से भी केवल 2.5% शिक्षक ही बिना किसी कारण के अनुपस्थित रहते है। 9% शिक्षक पैड छुट्टी पर और 7% शिक्षक गिवरमेंट ऑफिसियल कार्य में रहते हैं। इन्ही अतरिक्त कामों ( जैसे इलेक्शन ड्यूटी ) में उत्तर प्रदेश ने अपने 700 शिक्षक खो दिया है।
2010 में एक एक्नॉमिस्ट कार्तिक मुरलीधरन ने अपने रिपोर्ट में बताया की स्कूल विजिट के दौरान 23.6% शिक्षक अनुपस्थित पाए गए जिससे सरकार को हर साल 1.5 बिलियन का नुकसान होता है।
इंदौर के अहिल्या आश्रम में बायलॉजी पढ़ाने का लिए 1990 में संगीता कश्यप को चयनित किया गया और वह 2014 तक 23 साल स्कूल से अनुपस्थित थी
शिक्षा के अधिकार 2015-16 आर्टिकल के अनुसार एक शिक्षक को साल भर में 220 दिन पढ़ाना होता है पर वास्तव में एक शिक्षक केवल 42 दिन ही पढ़ाता है।

2:- छात्रों की अनुपस्थिति

रिपोर्ट के अनुसार 4.4% ही बच्चे स्कूल नहीं जाते है 64.2% बच्चे सरकारी स्कूलों में 30.8% बच्चे प्राईवेट स्कूल में और 0.7 % बच्चे अन्य स्कूल में जाते है।

Business Today जो एक माना जाना न्यूज वेबसाईट है उसने अपने एक आर्टिकल में बताया था की 80% इंजीनियर्स अपने जॉब का लिए फिट नहीं है और the economy times एक आर्टिकल ने बताया की 94% इंजीनियरिंग ग्रैजुएट परफेक्ट नहीं है अपने IT जॉब का लिए।

भारतीय शिक्षा को और बेहतर करने के क्या उपाय है ?

सरकार को जिस भी ऑफिशियल ड्यूटी के लिए शिक्षक को लगाता है वहा पर टेक्नॉल्जी का इस्तमाल करे या अलग से लोगो को बुला कर काम कराए।
सरकारी स्कूल में जो भी निरेक्षक निरक्षण के लिए जाते है वे ये देखते है की दूध दिया गया की नही भोजन मिला की नहीं पर ये नहीं देखते की किस विषय में क्या पढ़ाया गया क्या नहीं इस बात को भी सुधारना चाहीए निरेक्षक को।
छात्रों को उनके काबलियत के हिसाब से कक्षा का वितरण कर पढ़ाना चाहिए।

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